कितने दूर दूर हों हम दोनों के रास्ते
मिल जाते हैं जो बने इक दूजे के वास्ते
आ आ जैसे दिल है धड़कन है इक दूजे के वास्ते
जैसे आँख है दर्पण है इक दूजे के वास्ते
जैसे बरखा सावन है इक दूजे के वास्ते
इक सजनी इक साजन है इक दूजे के वास्ते
आ आ आ
उस रब ने जब दिल दिए दिल के दो टुकड़े किये
दोनों पे इक नाम लिखा इक राधा इक श्याम लिखा
अब ये दिल धड़कते हैं मिलते और बिछड़ते हैं
इक दूजे के वास्ते ...
हम दोनों इक जान हैं दो दिल इक अरमान हैं
लेकिन अब इस मोड़ पर देखें दामन छोड़कर
वक़्त का है ये फ़ैसला हम तुम हो जाएँ जुदा
मांगें खुशियों की दुआ
इक दूजे के वास्ते ...
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