चाँद ने कुछ कहा रात ने कुछ सुना तू भी सुन बेखबर
प्यार कर ओ हो प्यार कर
आई है चाँदनी मुझसे कहने यही मेरी गली मेरे घर
प्यार कर ओ हो ओ प्यार कर
चाँद ने कुछ कहा ...
क्या कहूँ क्या पता बात क्या हो गई
दिल्लगी ये मेरे साथ क्या हो गई
इक इशारा है ये दिल पुकारा है ये इससे चुरा ना नज़र
प्यार कर ओ हो हो प्यार कर
चाँद ने कुछ कहा ...
है कौन क्या खबर कोई तो है मगर
सपनों में है कहीं आता नहीं नज़र
मैं यहाँ वो वहाँ आ रही फिर यहाँ आवाज़ किसकी मगर
प्यार कर ओ हो हो प्यार कर
चाँद ने कुछ कहा ...
जिसपे हम थे मिटे उसको पता ही नहीं ओ
क्या गिला हम करें वो बेवफ़ा भी नहीं
हमने जो सुन लिया उसने कहा भी नहीं ऐ दिल ज़रा सोचकर
प्यार कर ओ हो प्यार कर
चाँद ने कुछ कहा ...
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