दिल तो पागल है दिल दीवाना है
पहली पहली बार मिलाता है यही सीने में फिर आग लगाता है
धीरे धीरे प्यार सिखाता है यही हँसाता है यही यही रुलाता है
दिल तो पागल है ...
सारी सारी रात जगाता है यही अँखियों से नींद चुराता है
सच्चे झूठे ख्वाब दिखाता है यही हँसाता है यही यही रुलाता है
दिल तो पागल है ...
इस दिल की बातों में जो आते हैं वो भी दीवाने हो जाते हैं
मंज़िल तो राही ढूंढ लेते हैं रस्ते मगर खो जाते हैं
दिल तो पागल है ...
सूरत से मैं ना पहचानूँगी नाम से भी ना उसको जानूँगी
देखूँगी कुछ ना मैं सोचूँगी दिल जो कहेगा वही मानूँगी
दिल तो पागल है ...
दिल का कहना हम सब मानें दिल ना किसी की माने
जान दी हमने जान गए सब एक वो ही न जाने
दिल तो पागल है ...
रहने दो छोड़ो ये कहानियाँ दीवानेपन की सब निशानियाँ
लोगों की सारी परेशानियाँ इस दिल की हैं ये मेहरबानियाँ
दिल तो पागल है ...
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