झूम चमेली झूम चमेली झांझर वाली झूम झूम
घूम चमेली घूम चमेली झांझर वाली घूम झूम
ओ रे काँची
काँच की गुड़िया
होंठों में बाँधे प्रेम की पुड़िया
ना उसे खोले ना मुँह से बोले
पलकों पे रख के आँखों से तौले
सुनियो सुनियो
ओ रे काँची ...
सुनियो सुनिया मिश्री से मीठी
आँखों में बंद है बात रसीली
हाँ ना उसे खोले ...
पहाड़ी पार चलना है तो परबत हटा दूँ
घटाओं में कहीं छुपना है तो सावन बुला दूँ
महुआ महुआ महका महका
महका महका महुआ महुआ
पहाड़ी पार ...
कोई उड़ता हुआ पंछी बता देगा ठिकाना
जहाँ से दिन निकलता है उसी टीले पे आ जाना
महुआ महुआ ...
ओ रे काँची ...
तेरा कोई परिचय हो तो ऐ सुंदरी बता दे
बड़ी मीठी मुस्कान है मुंदरी बना दे
महुआ महुआ ...
तेरा कोई ...
है परदेसी मुझे भूल जाएगा कहीं पे
दे वचन मैं पहन लूँ उसे गहना समझ के
महुआ महुआ ...
ओ रे काँची ...
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