रात का नशा अभी आँख से गया नहीं(PDF)

रात का नशा अभी आँख से गया नहीं
तेरा नशीला बदन बाहों ने छोड़ा नहीं
आँखें तो खोलीं मगर सपना वो तोड़ा नहीं
हाँ वहीं वो वहीं
साँसों पे रखा हुआ तेरे होंठों का सपना अभी है वहीं
ओ रात का नशा अभी ...

तेरे बिना भी कभी तुझ से मचल लेती हूँ
करवट बदलती हूँ तो सपना बदल लेती हूँ
तेरा ख्याल आए तो बल खा के पल जाता है
पानी की चादर तले तन मेरा जल जाता है
हाँ वहीं वो वहीं ...

तेरे गले मिलने के मौसम बड़े होते हैं
जन्मों का वादा कोई ये ग़म बड़े छोटे हैं
लम्बी सी इक रात हो लम्बा सा इक दिन मिले
बस इतना सा जीना हो मिलन की घड़ी जब मिले
हाँ वहीं वो वहीं ...

Date de génération : 2008-10-19 00:38+0200 ― Mentions légales.